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दुर्गा महाविद्यालय के 75वें स्थापना वर्ष पर कला, शिक्षा और संस्कृति का संगम

कला वाटिका एवं एलुमिनी मीट का भव्य उद्घाटन, दो पद्मश्री विभूतियों की रही विशेष उपस्थिति

चौपाल न्यूज इन http://Chaupalnews.inरायपुर।
दुर्गा महाविद्यालय के स्थापना के 75 वर्ष पूर्ण होने के गौरवशाली अवसर पर एलुमिनी समिति एवं दुर्गा
महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय परिसर में कला वाटिका एवं एलुमिनी मीट के उद्घाटन समारोह का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन किया गया। यह आयोजन शिक्षा, कला, संस्कृति और रचनात्मकता का जीवंत उदाहरण बना।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला रहे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में पद्मश्री श्री मदन चौहान गुरुजी एवं अंतरराष्ट्रीय पंडवानी गायिका पद्मश्री डॉ. उषा बारले की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
कार्यक्रम में शासकीय निकाय के अध्यक्ष श्री शेखर राव अमीन, महाविद्यालय के उप प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र अग्रवाल, एलुमिनी संगठन के अध्यक्ष श्री संतोष अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में प्राध्यापकगण, एलुमिनी सदस्य एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. प्रतिभा मुखर्जी साहूकार ने की।
कला वाटिका का उद्घाटन, छात्रों की रचनात्मकता बनी आकर्षण का केंद्र


सर्वप्रथम सभी अतिथियों द्वारा रिबन काटकर कला वाटिका का उद्घाटन किया गया। इसके पश्चात अतिथियों ने छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत वर्किंग एवं नॉन-वर्किंग मॉडल्स की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और छात्रों की नवाचार क्षमता की सराहना की।


कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत ज्ञानदायिनी मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पूजन के साथ हुई। कार्यक्रम का सशक्त संचालन छात्र संघ प्रभारी डॉ. अजय शर्मा द्वारा किया गया, जिन्होंने प्रारंभ में सभी अतिथियों का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया।


दुर्गा महाविद्यालय शिक्षा के साथ कला में भी अग्रणी
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. प्रतिभा मुखर्जी साहूकार ने कहा कि दुर्गा महाविद्यालय न केवल शिक्षा के क्षेत्र में बल्कि खेल, कला एवं रचनात्मक गतिविधियों में भी निरंतर अग्रणी रहा है।

शासकीय निकाय अध्यक्ष श्री शेखर राव अमीन ने महाविद्यालय के शिक्षकों को “डायमंड” की उपाधि देते हुए महाविद्यालय की समृद्ध लाइब्रेरी की विशेष प्रशंसा की।
उप प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र अग्रवाल ने कहा कि दुर्गा महाविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ कला और संस्कृति के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
संघर्ष से पद्मश्री तक की प्रेरक यात्रा
विशिष्ट अतिथि पद्मश्री श्री मदन चौहान गुरुजी ने अपने छात्र जीवन को स्मरण करते हुए कहा कि इसी महाविद्यालय से उन्हें संगीत की सच्ची समझ और दिशा मिली। उन्होंने अपने संघर्षपूर्ण जीवन के अनुभव साझा कर विद्यार्थियों को प्रेरित किया।
पंडवानी गायन ने बांधा समां
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि पद्मश्री डॉ. उषा बारले ने पंडवानी शैली में अतिथियों का स्वागत किया। इसके पश्चात उन्होंने महाभारत काल के चीरहरण प्रसंग को पंडवानी गायन के माध्यम से इतनी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया कि पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा।
छात्रों को मिला भविष्य निर्माण का संदेश


मुख्य अतिथि डॉ. संजीव शुक्ला, आयुक्त पुलिस ने अपने संबोधन में कहा कि आज का यह कार्यक्रम इसलिए भी विशेष है क्योंकि इसमें दो-दो पद्मश्री विभूतियों की उपस्थिति है।


उन्होंने कहा कि वे जो कुछ भी आज हैं, वह माता-पिता एवं गुरुजनों के आशीर्वाद का परिणाम है।
डॉ. शुक्ला ने छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि ईमानदारी से अध्ययन करें, लक्ष्य निर्धारित कर कार्य करें, क्योंकि आज का परिश्रम ही भविष्य के स्वर्णिम वर्षों की नींव रखता है।
कार्यक्रम के अंत में एलुमिनी एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री संतोष अग्रवाल द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।
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रायपुर, छत्तीसगढ़

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