डिपो प्रबंधन की लापरवाही से जनस्वास्थ्य पर मंडरा रहा गंभीर खतरा, कार्रवाई नहीं हुई तो होगा चरणबद्ध आंदोलन
चौपाल न्यूज इन रायपुर छत्तीसगढ़ आरंग/छतौना। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के छतौना स्थित डिपो से फैल रहे गेहूं के अन्न-कीड़ों का आतंक अब पूरे गांव के लिए गंभीर जनस्वास्थ्य संकट बन गया है। डिपो प्रबंधन की कथित लापरवाही के कारण हजारों ग्रामीणों का सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है। हालात ऐसे हैं कि घरों में रखे खाद्यान्न, कपड़े, रसोई सामग्री और अन्य घरेलू सामान तक कीड़ों से प्रभावित हो रहे हैं, जबकि गांव की मुख्य सड़क पर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि इस वर्ष कीड़ों का प्रकोप पिछले वर्षों की तुलना में कई गुना अधिक है। शाम करीब 4 बजे के बाद स्थिति और भयावह हो जाती है। उड़ते हुए कीड़े लोगों की आंखों में चले जाते हैं, जिससे तेज जलन और असहनीय परेशानी होती है। सबसे अधिक दिक्कत महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को झेलनी पड़ रही है।
डिपो प्रबंधन की लापरवाही से बिगड़े हालात
ग्रामीणों का आरोप है कि एफसीआई डिपो परिसर में लंबे समय से नियमित फ्यूमिगेशन, कीटनाशक दवा का सघन छिड़काव और वैज्ञानिक तरीके से कीट नियंत्रण नहीं किया जा रहा है। यही कारण है कि अन्न-कीड़ों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और अब पूरा गांव इसकी चपेट में आ गया है।

जनप्रतिनिधियों ने सौंपा ज्ञापन, तत्काल कार्रवाई की मांग
समस्या की गंभीरता को देखते हुए ग्राम पंचायत छतौना के सरपंच भोजराज यदु, पूर्व जिला पंचायत सदस्य परमानंद जांगड़े, जनपद सदस्य श्रीमती सरोजनी दिवाकर जांगड़े, उपसरपंच नयन यादव, पंच सुनील बारले, टीकम रात्रे, नारद यदु, ईश्वर नायक, गोकुल यादव, घनश्याम साहू, धीरज जोशी, राकेश जांगड़े सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने एफसीआई डिपो प्रबंधक को ज्ञापन सौंपकर तत्काल प्रभाव से पूरे परिसर में नियमित सघन कीटनाशक छिड़काव, वैज्ञानिक फ्यूमिगेशन, साफ-सफाई और स्थायी कीट नियंत्रण व्यवस्था लागू करने की मांग की।
‘यह केवल असुविधा नहीं, जनस्वास्थ्य का गंभीर संकट’
सरपंच भोजराज यदु ने कहा कि यह केवल गांव की समस्या नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो इसके दूरगामी दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं।
जनपद सदस्य श्रीमती सरोजनी दिवाकर जांगड़े ने कहा कि कई बार शिकायतों के बावजूद विभाग की उदासीनता दुर्भाग्यपूर्ण है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को देखते हुए तत्काल स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य परमानंद जांगड़े ने कहा कि समय-समय पर वैज्ञानिक तरीके से फ्यूमिगेशन और कीटनाशक छिड़काव होता तो आज यह भयावह स्थिति नहीं बनती। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
उपसरपंच नयन यादव ने कहा कि गांव में शाम के समय घरों के बाहर बैठना और सड़कों पर निकलना तक मुश्किल हो गया है। यह स्थिति प्रशासन की गंभीर लापरवाही को दर्शाती है।
कार्रवाई नहीं हुई तो होगा चरणबद्ध आंदोलन
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एफसीआई प्रबंधन ने तत्काल प्रभाव से अन्न-कीटों के प्रकोप पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो जनहित में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी एफसीआई प्रबंधन एवं संबंधित विभाग की होगी।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
डिपो परिसर में तत्काल सघन कीटनाशक दवा का छिड़काव।
नियमित वैज्ञानिक फ्यूमिगेशन।
डिपो परिसर की नियमित साफ-सफाई।
स्थायी कीट नियंत्रण योजना लागू की जाए।
पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
छतौना के ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस गंभीर समस्या का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो यह आने वाले समय में पूरे क्षेत्र के लिए बड़ा जनस्वास्थ्य संकट बन सकता है।
