सुशासन तिहार के दावों पर जमीनी सवाल: महंगाई, बेरोजगारी और कर्ज़ में डूबती पंचायतों से जनता परेशान

सुशासन तिहार के दावों पर जमीनी सवाल: महंगाई, बेरोजगारी और कर्ज़ में डूबती पंचायतों से जनता परेशान

ग्राम पंचायतों की बदहाल स्थिति, अधूरे विकास कार्य एवं जनसमस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपते एवं चर्चा करते स्थानीय जनप्रतिनिधि व ग्रामीण।

चौपाल न्यूज इन | रायपुर, छत्तीसगढ़ | चंद्रखुरीhttp://Chaupalnews.in
प्रदेश में एक ओर सरकार “सुशासन तिहार” के माध्यम से विकास, पारदर्शिता और बेहतर प्रशासन के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, अपराध, किसानों की समस्याएं और अब ग्राम पंचायतों की बदहाल आर्थिक स्थिति ने आम जनता की चिंता बढ़ा दी है।
गांवों से लेकर शहरों तक लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस, बिजली और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने गरीब और मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी है। आम परिवारों के लिए घर चलाना मुश्किल होता जा रहा है।
बेरोजगारी से युवाओं में बढ़ रही निराशा
प्रदेश के युवाओं के सामने रोजगार का संकट लगातार गहराता जा रहा है। पढ़े-लिखे युवा नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं, लेकिन रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहे। इससे युवाओं में असंतोष और निराशा का माहौल बनता जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है, जहां रोजगार के अभाव में बड़ी संख्या में युवा पलायन करने को मजबूर हैं।
अपराध और नशे का बढ़ता कारोबार बना चिंता का कारण
प्रदेश में बढ़ते अपराधों ने लोगों के भीतर असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। हत्या, लूट, चोरी और हिंसक घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी की चर्चाएं आम हो चुकी हैं।
इसके साथ ही अवैध नशे का कारोबार और खनन माफियाओं की सक्रियता को लेकर भी विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है। ग्रामीण इलाकों में युवा पीढ़ी पर नशे के बढ़ते प्रभाव को लेकर सामाजिक संगठनों ने भी चिंता जताई है।
पर्यावरण संकट और किसानों की बढ़ती परेशानी
जंगलों की अंधाधुंध कटाई और पर्यावरण संतुलन बिगड़ने का असर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में साफ दिखाई दे रहा है। गर्मी का बढ़ता असर, जल संकट और खेती पर पड़ता प्रभाव लोगों के लिए नई चुनौती बनता जा रहा है।
वहीं किसानों के सामने खाद की किल्लत सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। समय पर खाद उपलब्ध नहीं होने से खेती प्रभावित हो रही है और किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। कई जगह किसानों को सीमित मात्रा में खाद मिलने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
कर्ज़ में डूबती पंचायतें, विकास कार्य ठप
सबसे गंभीर स्थिति अब ग्राम पंचायतों की सामने आ रही है। जानकारी के अनुसार कई पंचायतें विकास कार्यों को पूरा करने के लिए कर्ज़ लेने तक मजबूर हो चुकी हैं। शासन से समय पर फंड जारी नहीं होने के कारण सड़क, नाली, पानी, स्ट्रीट लाइट और अन्य बुनियादी कार्य अधूरे पड़े हुए हैं।
ठेकेदारों का भुगतान महीनों से लंबित है, जिससे पंचायतों पर लाखों रुपये का बकाया चढ़ चुका है। गांवों में टूटी सड़कें, पानी की किल्लत, बंद स्ट्रीट लाइट और अधूरे निर्माण कार्य जमीनी हालात बयां कर रहे हैं।
सरपंच और पंचायत प्रतिनिधि लगातार फंड जारी करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
अनिल टंडन ने सरकार पर साधा निशाना
चंद्रखुरी मंडल अध्यक्ष अनिल टंडन ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि—
“सरकार सिर्फ आयोजनों और प्रचार में व्यस्त है, जबकि जमीनी हकीकत बेहद गंभीर है। महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं और पंचायतों की बदहाल आर्थिक स्थिति पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। ऊपर से अवैध खनन माफिया और प्रदेश भर में नशे का कारोबार बेखौफ चल रहा है। जब जनता को राहत ही नहीं मिल रही, तो फिर यह कैसा सुशासन है?”
बड़ा सवाल
जब पंचायतें खुद आर्थिक संकट और कर्ज़ में डूबी हों, किसान खाद के लिए परेशान हों, युवा रोजगार के लिए भटक रहे हों और आम जनता महंगाई से त्रस्त हो — तब “सुशासन” के दावे आखिर कितने वास्तविक हैं?
अब देखना होगा कि सरकार इन गंभीर मुद्दों पर केवल घोषणाएं करती है या जमीनी स्तर पर ठोस समाधान भी निकालती है।

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