चौपाल न्यूज इन http://Chaupalnews.inरायपुर, छत्तीसगढ़:
चरौदा धरसीवां स्थित प्राचीन मुक्तेश्वर शिवमंदिर में आज भक्तों की भारी उपस्थिति के बीच भव्य मेला और पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक समरसता का भी केंद्र बन गया है।
मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
मुक्तेश्वर शिवमंदिर भारतीय प्राचीन सभ्यता का प्रतीक है। पहले यह स्थल केवल एक टीला था, जिसमें टूटी-फूटी ईंटें और दो नारी मूर्तियाँ पाई गईं। टीले के पूर्व दिशा में गढ़ता था जिसमें हमेशा पानी भरा रहता था।

ग्रामवासियों ने 1080 में खुदाई कर प्राचीन शिवलिंग, पत्थर के बड़े- बड़े व्यंम और चौकोर नींव प्राप्त की। इससे स्पष्ट हुआ कि यहाँ प्राचीनकाल में विशाल मंदिर हुआ करता था।
मेला और पूजा-अर्चना
1973 में खुदाई से प्राप्त शिवलिंग को मुख्य मंदिर में स्थापित किया गया। तभी से प्रतिवर्ष यहाँ विशाल मेला लगता है। स्थानीय मान्यता है कि मुक्तेश्वर भगवान भोलेनाथ के दर्शन और बावली के पवित्र जल से आचमन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
आज के आयोजन में भक्तों ने सुबह से ही पूजा-अर्चना की और धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया। मेले में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

“चरौदा मुक्तेश्वर शिवमंदिर में आज भक्तों की भारी उपस्थिति में भव्य पूजा-अर्चना और मेला आयोजित।”
सौजन्य: समस्त ग्रामवासी, ग्राम पंचायत, ग्राम सभा, मुक्तेश्वर शिवमंदिर, चरौदा धरसीवां, रायपुर, छत्तीसगढ़
