“रक्षक” पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने हेतु रायपुर में आयोजित बैठक में आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा एवं विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
रायपुर | 15 अप्रैल 2026 | चौपाल न्यूज इन
छत्तीसगढ़ में बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने “रक्षक (RAKSHAK) पाठ्यक्रम” को अंतिम रूप दे दिया है। यह पाठ्यक्रम अब राज्य के महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में लागू किया जाएगा, जिससे विद्यार्थी बाल अधिकारों के प्रति जागरूक होकर समाज में सक्रिय भूमिका निभा सकें।

रायपुर स्थित होटल बेबिलोन में आयोजित “रक्षक” पाठ्यक्रम पर विश्वविद्यालयीन परामर्श बैठक में उपस्थित कुलपति, विशेषज्ञ एवं आयोग के अधिकारी
👉 क्या है “रक्षक” पाठ्यक्रम?
“रक्षक” पाठ्यक्रम एक अभिनव शैक्षणिक पहल है, जिसका उद्देश्य है:
विद्यार्थियों को बाल अधिकारों की जानकारी देना
बच्चों के प्रति सुरक्षा और संवेदनशीलता बढ़ाना
समाज में बाल संरक्षण के लिए जागरूक नागरिक तैयार करना
यह पाठ्यक्रम छात्रों को सिर्फ जानकारी ही नहीं, बल्कि व्यवहारिक रूप से भी तैयार करेगा।

🗣️ डॉ. वर्णिका शर्मा ने क्या कहा?
छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने अपने संबोधन में कहा:
“रक्षक पाठ्यक्रम एक शैक्षणिक कार्यक्रम से कहीं बढ़कर है। यह बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा का मजबूत सामाजिक अभियान है, जिससे आने वाली पीढ़ी सुरक्षित और जागरूक बनेगी।”

🤝 सरकार का सहयोग और एमओयू
इस पहल को सफल बनाने के लिए पूर्व में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े तथा उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा की उपस्थिति में महत्वपूर्ण एमओयू (MoU) संपन्न किया गया था।
यह समझौता राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में इस पाठ्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन का आधार बना।
🏫 इन विश्वविद्यालयों की रही भागीदारी
बैठक में राज्य के प्रमुख शासकीय और निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव एवं विशेषज्ञ शामिल हुए, जिनमें प्रमुख हैं:
पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय
कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय
संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय
श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी
एमिटी यूनिवर्सिटी
अंजनेय यूनिवर्सिटी
सभी ने इस पहल को समय की आवश्यकता बताते हुए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
📌 बैठक की मुख्य बातें
“रक्षक” पाठ्यक्रम की उप-इकाइयों (Sub-units) को अंतिम रूप दिया गया
विशेषज्ञों द्वारा गहन समीक्षा और सुझाव
व्यवहारिक और उपयोगी पाठ्यक्रम संरचना तैयार
आगामी शैक्षणिक सत्र से लागू करने की योजना
🔍 क्यों खास है यह पहल?
छात्रों को मिलेगा सामाजिक जिम्मेदारी का प्रशिक्षण
बच्चों के अधिकारों की रक्षा को मिलेगा मजबूत आधार
समाज में जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ेगी
युवा बनेंगे बदलाव के वाहक
🏁 निष्कर्ष
“रक्षक” पाठ्यक्रम छत्तीसगढ़ में बाल सुरक्षा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह पहल न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि समाज में बच्चों के सुरक्षित भविष्य की नींव भी रखेगी।
