छत्तीसगढ़ की विलुप्त होती लोकगाथाओं को मिला नया जीवन, साहित्यकार सम्मेलन में हुआ सम्मान
चौपाल न्यूज इन | रायपुर/गंडई पंडरिया, छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग रायपुर द्वारा 11 मई 2026 को न्यू सर्किट हाउस रायपुर में जिला स्तरीय साहित्यकार सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इस गरिमामयी सम्मेलन में प्रदेशभर से लगभग 200 साहित्यकारों, कवियों एवं लोक संस्कृति प्रेमियों ने सहभागिता निभाई। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी लोक साहित्य और लोक संस्कृति के वरिष्ठ अध्येता डॉ. पीसी लाल यादव की नई शोधपरक कृति “कुंवर अछरिया अउ राजा बेलसारिया” का विधिवत विमोचन किया गया।
समारोह में उत्तर रायपुर के विधायक एवं पूर्व सांसद सुनील सोनी, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा, सचिव अभिलाषा बेहार, साहित्यकार मीर अली मीर, छंद गुरु अरुण निगम, शशि दुबे एवं महेंद्र ठाकुर विशेष रूप से उपस्थित रहे।
लोकगाथाओं के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
इस अवसर पर अतिथियों ने डॉ. पीसी लाल यादव को उनके उत्कृष्ट शोध एवं साहित्यिक योगदान के लिए राजकीय गमछा, प्रतीक चिन्ह एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। डॉ. यादव लंबे समय से छत्तीसगढ़ी लोक साहित्य, लोक संस्कृति और लोक कला के संरक्षण एवं शोध कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

उनकी नई कृति “कुंवर अछरिया अउ राजा बेलसारिया” छत्तीसगढ़ की विलुप्त होती लोकगाथाओं पर आधारित है, जिन्हें पारंपरिक बांस गीत शैली में गाया जाता है। इन दुर्लभ लोकगाथाओं को डॉ. यादव ने ग्राम सोमई निवासी लोकगाथा गायक गोवर्धन यादव से संकलित किया है। इस महत्वपूर्ण कृति का प्रकाशन छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा किया गया है।
“कुंवर अछरिया” ऐतिहासिक और पुरातात्विक पहचान का प्रतीक
उल्लेखनीय है कि “कुंवर अछरिया” (सिंघनगढ़) छत्तीसगढ़ का एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक मेला स्थल है, जो कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा विकासखंड में स्थित है। यह स्थल प्रदेश की समृद्ध लोकपरंपरा और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
डॉ. पीसी लाल यादव के इस शोध एवं संकलन कार्य को छत्तीसगढ़ के साहित्यकारों, कलाकारों और लोक संस्कृति प्रेमियों ने ऐतिहासिक पहल बताते हुए राजभाषा आयोग की सराहना की तथा बधाई दी।
स्व. सुशील भोले पर प्रभावशाली वक्तव्य
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में डॉ. पीसी लाल यादव ने छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुशील भोले के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर तथ्यपूर्ण और प्रभावशाली वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने स्व. सुशील भोले की साहित्यिक कृतियों का विस्तृत विवेचन करते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ का सजग साहित्यकार बताया।

डॉ. यादव ने अपने संबोधन में कहा —
“सच ला सच लिखे अउ सच बोले, ओखर नाँव आय सुशील भोले।”
इस पंक्ति ने कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों और श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम का सफल संचालन विजय मिश्रा अमित द्वारा किया गया।
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